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Showing posts from July, 2020

हार

तुम्हे ज़रुरी था बताना के मैं हार गया तुमने मुझसे दो पल भी कुछ सीखा हो तो मिटा दो हर उस सीख को अगर मिटा पाओ मैं नही चाहता के तुम हार जाओ कुछ नही रखा खाली रास्तों में वहीं जाना जहां सब जाते हैं पागलपन कुछ नही एक बहाना है कुछ लोगों को छोटा दिखाना है अब कोई शहर छोटा शहर न रहा अब तुम्हे पहचानने वालें कोई और ही हैं तुम्हारे घर की खिडकियों से कुछ भी दिखे नज़रिया बनाने वाले कोई और ही हैं किसी भी गलत बात के खिलाफ न होना गलत और कुछ भी नही एक नज़रिया है मिटा दो हर उस नजरिए को अगर मिटा पाओ मैं नही चाहता के तुम हार जाओ