जिस जीवन को जीवन थकाए ना भाग्य को भाग्य हसाये ना जब यमुना भी गंगा सी निर्मल लगे तुम्हें उस जीवन में हम पुण्य करने आएंगे उस जीवन में हम ज्योत बनकर आएंगे रेवती के तारा की तरह उस जीवन में भी तुम ऐसे ही रहना आकाशगंगा की धारा की तरह मिट्टी के घर में घूप के पेड़ लेकर आना हम राह देखेंगे उस जीवन में हमारा भाग्य बनकर आना हम राह देखेंगे जिस जीवन में हम बलवान हों भाग्यशाली, रुचिर विद्वान हों जब विवशता तुम्हें आचरण न लगे उस जीवन में हम पुण्य करने आएंगे जिस जीवन को जीवन थकाए ना भाग्य को भाग्य हसाये ना जब यमुना भी गंगा सी निर्मल लगे तुम्हें उस जीवन में हम पुण्य करने आएंगे Arp 3 Feb 24 Bombay