तुम्हे ज़रुरी था बताना के मैं हार गया
तुमने मुझसे दो पल भी कुछ सीखा हो तो
मिटा दो हर उस सीख को अगर मिटा पाओ
मैं नही चाहता के तुम हार जाओ
कुछ नही रखा खाली रास्तों में
वहीं जाना जहां सब जाते हैं
पागलपन कुछ नही एक बहाना है
कुछ लोगों को छोटा दिखाना है
अब कोई शहर छोटा शहर न रहा
अब तुम्हे पहचानने वालें कोई और ही हैं
तुम्हारे घर की खिडकियों से कुछ भी दिखे
नज़रिया बनाने वाले कोई और ही हैं
किसी भी गलत बात के खिलाफ न होना
गलत और कुछ भी नही एक नज़रिया है
मिटा दो हर उस नजरिए को अगर मिटा पाओ
मैं नही चाहता के तुम हार जाओ
तुमने मुझसे दो पल भी कुछ सीखा हो तो
मिटा दो हर उस सीख को अगर मिटा पाओ
मैं नही चाहता के तुम हार जाओ
कुछ नही रखा खाली रास्तों में
वहीं जाना जहां सब जाते हैं
पागलपन कुछ नही एक बहाना है
कुछ लोगों को छोटा दिखाना है
अब कोई शहर छोटा शहर न रहा
अब तुम्हे पहचानने वालें कोई और ही हैं
तुम्हारे घर की खिडकियों से कुछ भी दिखे
नज़रिया बनाने वाले कोई और ही हैं
किसी भी गलत बात के खिलाफ न होना
गलत और कुछ भी नही एक नज़रिया है
मिटा दो हर उस नजरिए को अगर मिटा पाओ
मैं नही चाहता के तुम हार जाओ
Too good ...brings up the emotion so well ...brilliant one...
ReplyDeleteThanks Alice
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ReplyDeletethanks ikigai
ReplyDeleteकवी कभी हारता नहीं, वो जनता है की हार और जीत भी बस एक नज़रिया भर है 🙂
ReplyDelete:)
Deleteअब कोई शहर छोटा शहर न रहा
ReplyDeleteअब तुम्हे पहचानने वालें कोई और ही हैं
तुम्हारे घर की खिडकियों से कुछ भी दिखे
नज़रिया बनाने वाले कोई और ही हैं.. nazariya banewale koi aur hi hai..... what a thought.. amazing..
Thankyou so much
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DeleteThe first four lines got tears into my eyes ❤️❤️ I was never intrested in reading poems until I found ur poems ....it's magical & fresh
ReplyDeleteBlessings for me. Thank you so much ikigai
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