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Showing posts from February, 2025

अमावस वाला इतवार

उस टूटी दीवार के पार है  आज अमावस वाला इतवार है  यहाँ से निकल नहीं पायेंगें ये भी एक डर  था कभी  हर तीसरा मकान  दोस्तों का घर था कभी  चाय में सिमटी बारिश मिलती है  धूप  में भीगे बचपन मिलतें हैं टूटी दीवारों पे यादें मिलती हैं सब मिल जाता है पर नही मिलता  तेरे माथे के शिकन देख लेते थे अँधेरे में जीवन देख लेते थे  हर नए पते से ढूंढते तो हैं  पुराने पते पे अब घर नहीं मिलता  रोज़मर्रे में दफन मोहब्बत  आज हमसे भी ज़्यादा बेकार है  उस टूटी दीवार के पार है  आज अमावस वाला इतवार है