उस टूटी दीवार के पार है
आज अमावस वाला इतवार है
यहाँ से निकल नहीं पायेंगें
ये भी एक डर था कभी
हर तीसरा मकान
दोस्तों का घर था कभी
चाय में सिमटी बारिश मिलती है
धूप में भीगे बचपन मिलतें हैं
टूटी दीवारों पे यादें मिलती हैं
सब मिल जाता है पर नही मिलता
तेरे माथे के शिकन देख लेते थे
अँधेरे में जीवन देख लेते थे
हर नए पते से ढूंढते तो हैं
पुराने पते पे अब घर नहीं मिलता
रोज़मर्रे में दफन मोहब्बत
आज हमसे भी ज़्यादा बेकार है
उस टूटी दीवार के पार है
आज अमावस वाला इतवार है

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