इस काल-खंड के अंत में, जब ऐनक पहने जायेंगे, घड़ी देखी जायेगी, कलम उठाएं जायेंगे, धोती, सड़कें, खेत, भूख, सबकुछ नापे जायेंगे, सबसे लम्बे नाप तब पश्चाताप के आएंगे, इस काल-खंड के अंत में, जब देवों को परखा जायेगा, कोई अपने प्राण के लिए प्रतिष्ठा नहीं गवायेगा, नहीं लगेगा डर किसी को काल की समाधि से, डर कभी उस चौखट पर दिया नहीं जलाएगा, जब ज्ञात होगा युग भी क्षणभंगुर ही होतें हैं, क्षण भर के शौर्य में सदियों के सम्बन्ध खोते हैं, इस काल-खंड के अंत में, जब देवों को परखा जायेगा, सब शुन्य से प्रारम्भ होगा, कुछ वापस न आएगा, इस काल-खंड के प्रारम्भ में, जब कपड़े बदलें जायेंगे, पराकाष्ठा के चार नये बड़े नाम छपवाएंगे, बर्तन, चूल्हा, चोका, रूचि नए घर जायेंगे, सबसे गहरे छाप तब पश्चाताप के आएंगे अर्पिता २० अप्रैल २०२६ मुंबई